best news portal development company in india

स्मृतिमें स्व. जगदीशजी उपाध्याय के सुपुत्रों श्रीकान्त तथा किशोर द्वारा यहां के मातोश्री वृद्धाश्रम में कुलर भेंट देकर वहां के निवासी सदस्यों को राहत की सांस दिलायी। गरमी तकलीफ और दिक्कत हो रही है। यह दोनों बन्धुओं को देखा नहीं गया इसलिए उन्होंने तुरन्त ही २ बड़े हवा के कुलर वृद्धाओं को सुविधा के लिए बाजार से सीधे वृद्धा आश्रम में मंगवा कर शुरू करवा दिए नहीं, और चपूर्ण न भी विका इस ध्यक्ष श्री – श्री – श्री स्थानी न श्री और ष्ट्रीय इस ऐसे मंडल र के परजी अधिक जानकारी के अनुसार स्वर्गीय पिताजी कै. जगदीशजी उपाध्याय साहब के १२ वी की रस्म पर यही के स्थानिक तापडिया वृद्धा आश्रम में अन्नदान हेतू उपाध्याय परिवार से श्रीकांत एवं ।श्री. किशोर उपाध्याय बंधुओं ने उनके पिताजी के स्मृतिमें अन्नदान करने गए थे। वहां पर उन्होंने देखा कि इस भीषण चान नपेक्षा स्ट के लागू गिता किचा है। यह बड़े गर्व की बात है। यह केवल वृद्धाओं के लिए थंडी हवा के कुलर हुए, परन्तु सभी समाज के लिए एक गौरवमयी क्षण है। nt

SHARE:

 

छत्रपती संभाजीनगर के प्रख्यात केटरींग व्यवसायी तथा यशश्री केटर्स के प्रमुख श्री जगदीशजी माणकलालजी उपाध्याय का दि. १६-४-२०२६ को देवलोकगमन हुआ। उन्हीं के स्मृतिमें स्व. जगदीशजी उपाध्याय के सुपुत्रों श्रीकान्त तथा किशोर द्वारा यहां के मातोश्री वृद्धाश्रम में कुलर भेंट देकर वहां के निवासी सदस्यों को राहत की सांस दिलायी।

गरमी में बुजुर्ग लोगों को काफी तकलीफ और दिक्कत हो रही है। यह दोनों बन्धुओं को देखा नहीं गया इसलिए उन्होंने तुरन्त ही २ बड़े हवा के कुलर वृद्धाओं को सुविधा के लिए बाजार से सीधे वृद्धा आश्रम में मंगवा कर शुरू करवा दिए

नहीं, और चपूर्ण न भी विका इस ध्यक्ष श्री – श्री – श्री स्थानी न श्री और ष्ट्रीय इस ऐसे मंडल र के परजी

अधिक जानकारी के अनुसार स्वर्गीय पिताजी कै. जगदीशजी उपाध्याय साहब के १२ वी की रस्म पर यही के स्थानिक तापडिया वृद्धा आश्रम में अन्नदान हेतू उपाध्याय परिवार से श्रीकांत एवं ।श्री. किशोर उपाध्याय बंधुओं ने उनके पिताजी के स्मृतिमें अन्नदान करने गए थे। वहां पर उन्होंने देखा

यह बड़े गर्व की बात है। यह केवल वृद्धाओं के लिए थंडी हवा के कुलर हुए, परन्तु सभी समाज के लिए एक गौरवमयी क्षण है। यह एक आदर्श, प्रेरणादायी है। यह सिर्फ कुलर है नहीं है….. यह ठंडी हवाओं में घुलती दुवाएं है। यह पुण्य यह संस्कार है और यही असली सुख सेज दान है केवल फोटो पर हार फूल चढ़ा कर सुगंधित अगरबत्ती करने से अपने पितरों को शांति एवं मुक्ति हासिल नहीं होता है। दिखावा करने से मृत व्यक्तियों को शान्ति नहीं मिलती तो इस प्रकार उनके नाम से कुछ करने से उनकी खुला होता है। आत्मा को मुक्ति का मार्ग

ठीक है यह तो अपनी रीति धर्म-परंपरा नुसार किया जाता ही है और करना भी चाहिए लेकिन इसमें बोध लेने जैसा यह है

जरूरत मंद एवं मजबूर लोगों को सुविधा कर उन उम्र दराज गरीब बुर्जुगों की अंतर आत्मा से जो दुवाएं और सच्चा आशीर्वाद निकला सही मायने वही उनके स्वर्गीय पिताजी के आत्मा को शांति और मुक्ति का मार्ग तय करने में बहुत सहायक है।

इस विषय एवं माध्यम से में सभी सम्माननीय समाज बांधओ को नम्र निवेदन एवं विनंती करना चाहता हूं हम लोग भी अपने जन्म दिन, विवाह वर्षगांठ पर या अपने परिवार के पितरों के स्मृति पर अपने-अपने यथा शक्ति एवं इच्छा शक्ति नुसार गरीब मजबूर जरूरत मंदो में सुविधा या दान कर पुण्य लाभ प्राप्त करे और इंसानियत की एवं दया भाव की भावना मिसाल कायम करें ऐसा आहवान रमाकांत उपाध्याय, राष्ट्रीय प्रचार मंत्री अखिल भारतवर्षीय श्री गुर्जर गौड ब्राहाण महासमा ने किया है। इस महान कार्य के लिए  छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक गौतम उजाला पाली की और से हार्दिक बंधाई एवं शुभकामनाएं  दी गई।

 

 

Gautam Ujala
Author: Gautam Ujala

CHHAGAN LAL BHARDWAJ, Chief Additor, Pali( Rajsthan) mo-95090 70217

Leave a Comment

best news portal development company in india
best news portal development company in india
और पढ़ें