*चिकित्सा विभाग की सक्सेस स्टोरी*
*समय पर उपचार से बची दो जिंदगियां*
*बाली जिला अस्पताल में हाई-रिस्क गर्भवती को मिला जीवनदान, मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित*
बाली (पाली), 17 जुलाई 2026/ चिकित्सा विभाग

की त्वरित कार्रवाई, 104 एम्बुलेंस सेवा की तत्परता और बाली जिला अस्पताल के चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से एक हाई-रिस्क गर्भवती महिला एवं उसके गर्भस्थ शिशु की जान सुरक्षित बचा ली गई।
सीएमएचओ डॉ विकास मारवाल ने बताया कि नवली पत्नी गोविंद राम जोगियों, निवासी तालाब गुमान (जिला उदयपुर), जो आदिवासी क्षेत्र की रहने वाली हैं, खेत में मजदूरी के दौरान अत्यधिक कमजोरी की हालत में थीं। इस दौरान समाजसेवी आसिफ खान नायक ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल बाली के ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हितेन्द्र पी. वागोरिया को सूचना दी।
सूचना मिलते ही डॉ. वागोरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद 104 एम्बुलेंस के माध्यम से महिला को शीघ्र बाली के जिला अस्पताल लाया गया।
अस्पताल में पीएमओ डॉ. भरत टेलर एवं उनकी टीम ने बिना विलंब जांचें एवं सोनोग्राफी करवाई। जांच में महिला 32 सप्ताह की गर्भवती पाई गई तथा उसका हीमोग्लोबिन मात्र 6 ग्राम/डीएल मिला। चिकित्सकों ने इसे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति मानते हुए तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू किया और विशेषज्ञ निगरानी में भर्ती कर उपचार प्रारंभ किया।
समय पर उपचार मिलने से महिला की स्थिति में सुधार है तथा मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं। चिकित्सकों का प्रयास है कि हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार के बाद सुरक्षित एवं सफल प्रसव कराया जाए।
महिला पहले से दो बच्चों की मां है। उपचार के दौरान परिवार को ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर प्रेम प्रकाश ने परिवार कल्याण संबंधी परामर्श भी दिया गया, जिस पर समाजसेवी आसिफ खान नायक की समझाइश से परिवार ने प्रसव के बाद स्थायी परिवार नियोजन (नसबंदी) अपनाने की सहमति दी।
यह घटना दर्शाती है कि समय पर पहचान, त्वरित रेफरल, 104 एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सकों की संवेदनशील कार्यशैली से गंभीर परिस्थितियों में भी मां और शिशु का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है।
Author: Gautam Ujala
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