*अखिल भारतवर्षीय श्री गुर्जरगौड़ ब्राह्मण महासभा*
सम्माननीय स्वजातीय बंधुगण एवं मातृ शक्तियों
जय महर्षि गौतम
आप सभी समाज बंधुओ से सानुरोध निवेदन है कि सभी जिला से जिला कलेक्टर के समक्ष ज्ञापन पत्र देकर के एक प्रति पाली से प्रसारित गौतम उजाला न्यूज चैनल (र्पोटल) और भारद्वाज टाईम्स यू टुब मे छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक को अवशय भेजे। मेरे मोबाईल नंबर 9509070217 है।
मेरा कहना है, कि अधयक्ष सोहनलाल बी सिवाल, पाली जिला महर्षि गौतम सुत सेवा समिति, और शहर समिति और पाली जिला गुर्जरगौड ब्राह्रामण सभा, तीन संसथाओ द्वारा सामूहिक रुप से, अथवा अलग, अलग शीध्र ही एकत्रित होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाते। और एक प्रति छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक गौतम उजाला पाली को भी प्रसारित प्रकाशित हेतु भेजने की कौशिश करावे।
यूजीसी द्वारा 13 जनवरी 2026 से लागू नई नियमावली पूर्ण रूप से देश को आंतरिक युद्ध में धकेलने वाली नजर आ रही है उपरोक्त नियम जहां उच्च वर्ग के पूर्ण रूप से खिलाफ है वहीं दूसरी और अन्य वर्गों के लिए समरसता वाले नहीं है।
ऐसी स्थिति में आप सभी से अनुरोध है अपने-अपने जिला मुख्यालय पर आप ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम जिलाधीश महोदय को प्रेषित करें । और तत्काल प्रभाव से 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए नियमों को निरस्त करने की मांग करें ।
भारत सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाले यूजीसी के द्वारा उपरोक्त नियमावली लागू की गई है ।
यह जानबूझकर समाज को तोड़ने का प्रयास है जिसका की असर समाज ही नहीं संपूर्ण देश पर पड़ने वाला है ।
यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाला आयोग है जिसे हम यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन कहते हैं इस स्तर पर या निचले स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में जातिगत भेदभाव को लेकर भारत सरकार द्वारा पहले से ही विभिन्न प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया बनाई जा चुकी है।
इसलिए इसकी शिक्षा के क्षेत्र में आज कोई भी आवश्यकता नहीं है।
आप चाहे तो जो इसका पक्ष ले रहे हैं उनसे इन प्रश्नों का उत्तर भी पूछ सकते हैं। या इसे लागू करना जरूरी है तो इस पक्ष को भी जो नीचे दिया जा रहा है ध्यान रखकर समावेश कर इसमें परिवर्तन करना चाहिए
1️⃣ क्या सामान्य वर्ग का छात्र, उसके साथ हुए जातिगत भेदभाव की शिकायत समता समिति में कर सकता है?
2️⃣ झूठी शिकायतों से बचने के लिए क्या प्रावधान हैं?
झूठी शिकायत करने वाले को क्या दंड मिलेगा?
3️⃣ यह कैसे मान लिया गया है कि तथाकथित जातिगत शोषण केवल सामान्य वर्ग का पुरुष ही कर सकता है,
जबकि आरक्षित वर्गों के कई समुदाय भारत के प्राचीन राजवंशों से अपना इतिहास जोड़ते हैं?
4️⃣ भेदभाव की स्पष्ट परिभाषाएँ क्या हैं?
कौन-से कृत्य स्पष्ट रूप से भेदभाव माने जाएँगे?
🌍 दुनिया के ज़्यादातर देश प्रतिभा को बढ़ावा देते हैं,
लेकिन हमारे यहाँ नीतियाँ अक्सर प्रतिभा को हतोत्साहित करती दिखती हैं।
📢 सरकार को सामान्य वर्ग की समस्याएँ ज़रूर सुननी होंगी,
क्योंकि 35 करोड़ सामान्य वर्ग के लोग अपनी आत्मरक्षा और अधिकारों के लिए निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं ।
कृपया सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में आगे आए एवं देश को तोड़ने वाली इस नियमावली को तत्काल निरस्त करने हेतु संकल्पित हो ।
अपने अपने जिला मुख्यालय पर दिए गए ज्ञापन की फोटो सहित जानकारी पहुंचाने का भी कष्ट करें ।
आपका अपना छगनलाल भारद्वाज प्रधान संपादक गौतम उजाला पाली एवं मीडिया प्रभारी अखिल भारतवर्षषिय श्री गुर्जरगौड ब्राह्रामण महासभा पाली मो 9509070217
Author: Gautam Ujala
CHHAGAN LAL BHARDWAJ, Chief Additor, Pali( Rajsthan) mo-95090 70217




