पाली लाखोटिया तालाब की चादर ओटा जो चादर वाले बालाजी मंदिर और मंदिर के ठीक सामने बालाजी उधान बनाने की जनता की माँग, जिला कलेक्टर लक्ष्मी नारयण मंत्री के समक्ष लिखित मे ज्ञापन पुर्व पार्षद ताराचंद टाँवरी, महेंद्र वैष्णव, घेवरचंद पटेल के नेतृत्व मे दिया ज्ञापन। जबकि नगर निगम द्वारा चौपाटी योजना प्रस्तावित को डाला खटाई मे। दूसरी तरफ अग्रसेन वाटिका के गैट खोलने पर लगाया नगर निगम ने विराम। सबसे पहले मुख्य गेट एक ही था। उसके गैट नंबर दो, जहाँ चौपाटी योजना लागू होती है। और फिर अभी अभी गैट नंबर तीन की औपनिग की गई। लेकिन नगर निगम की बिना परमीशन के गैट खोलने पर लगाया सूचना पटट।
उपरोक्त सभी को ध्यान में रखते हुये देखा जाये तो सबसे प्रथम तो नगर निगम ने धौबीघाट बना कर दिया, दुसरे मे हाथी की समाधि ओटा मे बनवाने पर चुप्पी साधी, और अब अग्रसेन वाटिका के गैट खोलने पर भी कोई उचित कार्य वाही नही की। और अब चौपाटी योजना प्रस्तावित को लागू करने का नकशा तैयार कर मौके पर लागू करना प्रारंभ किया, तो पूर्व पार्षदो को साथ लेकर बालाजी मंदिर के पुजारी, जनता के सहयोग से जिला कलेक्टर के समक्ष नारेबाजी, और लिखित मे ज्ञापन दिया गया है। और अभी मौके पर तारबंदी करके दीवार पर बालाजी उधान भी लिख दिया गया है।
इन सब के बावजूद एक बात और विचारणीय बिंदु है, कि लाखोटिया तालाब की चादर ओटा की जमीन नगर निगम की ही है। या सिँचाई विभाग के क्षेत्राधिकार में शामिल है। अब देखते हैं कि ऊँट किस करवट बैठता है?
(छगनलाल भारद्वाज प्रधान सम्पादक)
Author: Gautam Ujala
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