पाली। राजस्थान प्रांतीय श्री गुर्जरगौड़ ब्राह्मण सभा भूणाबांय अजमेर के अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा से सबसे पहले महासभा से मान्यता दिलाने की बात सबसे पहले राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी छगनलाल भारद्वाज से हुई थी।और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी छगनलाल भारद्वाज ने अखिल भारतवर्मषिय श्री गुर्जरगौड़ ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी,व प्रधानमंत्री प्रद्युम्न जौशी से हुई थी।जब वो पाली से इंदौर,एम पी जा रहे थे।तब रास्ते में सफर के दौरान छगनलाल भारद्वाज ने प्रधुमन जौशी को मोबाइल पर बात हुई थी।उसके बाद अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी से भी वार्तालाप संवाद हुआ था।और राधेश्याम शर्मा से बात करके जोधपुर में बुलाया ,मिटींग भी रखी थी।जिस दिन जोधपुर जाना तय था,तो उसके पूर्व पाली भारतीय विधा मंदिर में कोई कार्यक्रम के कार्ड देने आये थे,तो राष्ट्रीय एवं प्रांतीय उपाध्यक्ष गौरधन जौशी,ने मेरे को मेरे नाम का कार्ड के लिए बुलाया,जब में छगनलाल भारद्वाज भारतीय विधा मंदिर गया,तो वहां पर गौरधन जौशी,और सोहनलाल जौशी,दोनों छगनलाल भारद्वाज के गले पड़ गये,और महासभा अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी को लेकर खरी खौटी सुनायी।और हौले राधेश्याम शर्मा क्यों आयेंगे जोधपुर,नहीं आयेंगे। हमारे मिलकर अभी राधेश्याम शर्मा गये है।और हकीकत में यही हुआ। दुसरे दिन पाली से छगनलाल भारद्वाज राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी तो महासभा अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी से मिलने गये।लेकिन राधेश्याम शर्मा नहीं आये।यह सारा घटनाक्रम गौरधन जौशी प्रांतीय उपाध्यक्ष बनाया गया था,और महासभा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।और अब राधेश्याम शर्मा, अध्यक्ष, राजस्थान प्रांतीय श्री गुर्जरगौड़ ब्राह्मण सभा भूणाबांय अजमेर को महासभा से मान्यता दी गई।जिसकी महासभा प्रधानमंत्री प्रद्युम्न जौशी ने पुष्कर में विगत दिनों आयोजित प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित समारोह में अपने उद्बोधन में पुषिट की गई।यह सब ठीक है।जो महासभा अध्यक्ष को लेकर राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी छगनलाल भारद्वाज से महासभा अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी के बारे में खरी खौटी सुनाने का क्या मतलब था।और अब महासभा अध्यक्ष वाशिंग मशीन से निकल कर सही और शुद्ध हो गये।और पहले बहुत खराब थे। महासभा अध्यक्ष श्री ओम प्रकाश जौशी तो चौथीं बार अध्यक्ष बने हैं।और महासभा में हमेशा वर्चस्व कायम रहेगा।हम हमेशा स्वतंत्र है,और रहेंगे।हमने कभी भी अपनी कलम की धार को झुकने नहीं दिया।और चापलूसी व चाटुकारिता से दूर है।इतना जरूर है,कि महासभा पहले वाली महासभा नहीं रही है।क्योंकि महासभा में जो कभी महासभा में दिखाई तक नहीं दिये।सदैव खिलाफत करने वालों,मुंह पर और पीठ पिछे और,रंग दिखाने में शातिर है।और चापलूसी और चाटुकारिता से अपना मतलब निकालना जानते हैं।समय की हवा के साथ चलना जो जानते है।वो ही अपना उलू सीधा करते हैं।दैखते है,कि ऊंट किस करवट बैठता है?
(छगनलाल भारद्वाज प्रधान संपादक,गौतम उजाला)
Author: Gautam Ujala
CHHAGAN LAL BHARDWAJ, Chief Additor, Pali( Rajsthan) mo-95090 70217


