*रैपिड रोविंग एवं डायग्नोस्टिक टीम ने जिले में फसलों का व्यापक सर्वे*
पाली, 03 फरवरी। कृषि आयुक्तालय, राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार कृषि खंड जालौर के अधीनस्थ क्षेत्रों में कीट-व्याधि प्रकोप की स्थिति का आंकलन करने तथा कृषकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए रैपिड रोविंग सर्वेक्षण एवं नैदानिक दलों का गठन अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जालौर खंड, जालौर द्वारा किया गया। गठित दल के सदस्यों द्वारा पाली जिले के कृषि उप-जिला बाली एवं पाली क्षेत्र के ग्राम बाली, पेरवा, जवाईबांध, नेतरा, साण्डेराव, लापोद, ढोला, खौड, रानी, गुडा ऐन्दला, पाली, रोहट क्षेत्र में कृषकों के खेतों का भ्रमण कर प्रमुख फसलों में कीट एवं व्याधियों की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण किया गया। यह जानकारी उपनिदेशक कृषि सामान्य डॉ. खुमान सिंह रूपावत जालौर ने दी।
*फसलों की स्थिति एवं अवलोकन-*
उन्होंने बताया कि भ्रमण के दौरान सरसों, गेहूं, तारामीरा, चना, अरंडी, नींबू, धनिया, मिर्च, मैथी इत्यादि फसलों का निरीक्षण किया गया, जिसमें निम्न स्थिति पाई गई।
चना फसल में कहीं-कहीं फली छेदक कीट हेलिकोवर्पा अरमिजेरा का साण्डेराव व खौड क्षैत्र में प्रकोप आर्थिक देहली स्तर से अधिक देखा गया। जिसके नियत्रंण हेतु इमामेक्टीन बेंजोंइट के छिडकाव की अनुशंसा की गई।
सरसों फसल में भी साण्डेराव व खौड क्षेत्र में एफीड़ कीट का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से अधिक पाया गया, परन्तु फसल के पकाव स्थिति में होने से कीटनाशी का छिडकाव आवश्यक नही है। धनिया में एफीड कीट का प्रकोप देखा गया। कही-कही पर कीट आर्थिक हानी स्तर से अधिक था।
सब्जियों की फसलों में कीट प्रकोप सामान्य देखा गया। एफीड के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोपिड 17.8 प्रतिशत एसएल का 5 मिली. प्रति 15 लीटर पानी अथवा नीम तेल 2 मिली. प्रति लीटर पानी मे मिला कर छिडकाव किया जावें। जो वर्तमान में आर्थिक क्षति स्तर से कम रहा। तथापि पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए प्रकोप बढ़ने की संभावना के कारण निरंतर निगरानी के निर्देश फील्ड स्टाफ को दिए गए। सरसों व तारामीरा में कहीं-कहीं ओरोबैंकी (परजीवी खरपतवार) की समस्या भी देखी गई। तारामीरा फसल में एफीड का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से अधिक पाया गया। जिसके नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोपिड 17.8 प्रतिशत एसएल का 5 मिली. प्रति 15 लीटर पानी मे घोल कर छिडकाव किया जावे तथा जो फसल पकाव के नजदीक हो उसमे कीटनाशी के छिडकाव की आवश्यकता नही है।
गेहूं फसल में अल्टरनेरिया ब्लाईट का प्रकोप देखा गया। जवाईबांध क्षेत्र में अल्टरनेरिया ब्लाईट का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से अधिक पाया गया। मौके पर उपस्थित किसानों को रोग के नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी मे मिलाकर छिडकाव करने का सुझाव दिया गया तथा किसानों को सलाह दी गई कि किस्म को या पुराने गेहूॅ बीज को बदल कर उपयोग में लिया जावे व आगामी फसल लेते समय बीजोपचार आवश्यक रूप से किया जावे।
नींबू में कही-कही पर सिस्ट्रस केंक्कर व लिफ माईनर की समस्या देखी गई। टमाटर पर लिफ माईनर का प्रकोप देखा गया जो आर्थिक हानि स्तर से कम था।
*कृषकों की सहभागिता-*
भ्रमण के दौरान स्थानीय सहायक कृषि अधिकारी दीपाराम एवं कृषि पर्यवेक्षक घनश्याम व मधु यादव के साथ-साथ कृषक गिरधारी सिंह राजपुत, गोवर्धन सिंह, परबतसिंह राजपुत साण्डेराव व लालाराम माली जवाईबांध व सोहनलाल सिरवी सागंवा व गणेश दास पुत्र विरमदास वैष्णव पाली आदि कृषक अपने-अपने खेतों में उपस्थित रहे एवं फील्ड भ्रमण में सहयोग प्रदान किया। रैपिड रोविंग सर्वेक्षण के दौरान अधिकांश फसलों में कीट-व्याधि का प्रकोप नियंत्रण स्तर में पाया गया। संभावित प्रकोप को दृष्टिगत रखते हुए फील्ड स्टाफ को सतत निगरानी, समय पर परामर्श एवं कृषकों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए गए।
*दल में ये अधिकारी मौजूद रहे*
उपनिदेशक कृषि (सामान्य), अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जालौर खंड, जालौर डॉ. खुमान सिंह रूपावत, उपनिदेशक (शस्य) एटीसी सुमेरपुर डॉ. भानुप्रकाश शर्मा, कृषि अनुसंधान अधिकारी, उपनिदेशक (शस्य) एटीसी सुमेरपुर, डॉ. अनिल कुमार मावलिया, कृषि सहायक आचार्य, कृषि अनुसंधान उपकेन्द्र, सुमेरपुर, डॉ. जितेन्द्र कुमार शर्मा, सहायक निदेशक कृषि (वि), बाली, शंकरलाल, कृषि अधिकारी (पौध संरक्षण), सहायक निदेशक कृषि (वि), बाली, भानुप्रताप सिंह हाडा, कृषि अधिकारी (पौध संरक्षण), सहायक निदेशक कृषि (वि), पाल, राम गोपाल स्वामी, कृषि अनुसंधान अधिकारी एग्री क्लीनिक व मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, संयुक्त निदेशक कृषि (वि.) पाली, करण सिंह, कृषि अधिकारी (सामान्य), कार्यालय संयुक्त निदेशक कृषि (वि.) पाली, जयनारायण डामोर, आदि उपस्थित रहे।
Author: Gautam Ujala
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