*इमरजेंसी में लाईफ सेवर साबित होती है सीपीआर व फर्स्ट एड टेक्नीक:-सीएमएचओ*
*वीसी के माध्यम से बुनियादी चिकित्सा कौशल को जागरूक करने एवं प्रशिक्षित करने के लिए प्रशिक्षण आयोजित*
पाली,14 जनवरी 2026/ सीएमएचओ डॉ विकास मारवाल ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं सही उपचार कई बार किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है।
वे बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बुनियादी चिकित्सा कौशल जैसे सीपीआर फर्स्ट एड तकनीकी को जागरूक करने एवं प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित प्रशिक्षण में चिकित्सा अधिकारियों व कार्मिकों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से जिले के जिला एवं उप जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्थानीय चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) एवं फर्स्ट एड तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान एनेस्थेसिओलॉजिस्ट डॉ अंकित व्यास, डिप्टी डायरेक्टर डॉ बाबूलाल राजपुरोहित ने सभी को प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान इन्होंने बताया कि समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार गंभीर स्थिति में मरीज के जीवन की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सड़क दुर्घटनाओं, हृदय रोगों एवं अन्य आकस्मिक घटनाओं को देखते हुए चिकित्सा कर्मियों का सीपीआर में दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। डॉ. व्यास ने बताया कि यदि चिकित्सा एवं नर्सिंग स्टाफ सीपीआर और फर्स्ट एड में दक्ष होगा, तो मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने से पहले ही उसकी स्थिति को स्थिर किया जा सकेगा। इसी कड़ी में बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ विकास मारवाल, डिप्टी सीएमएचओ डॉ वेदांत गर्ग, डीपीएम भवानी सिंह, एनसीडी से विजय छीपा, मनोज गुर्जर आदि उपस्थित रहे।
वीसी में सभी बीसीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, यूपीएचसी के चिकित्सा अधिकारी एवं नर्सिंग अधिकारी, सीएचओ व एएनएम उपस्थित रहे। प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर मेडिकल कॉलेज से डॉ अंकित व्यास, डिप्टी डायरेक्टर डॉ बाबूलाल राजपुरोहित द्वारा दिया गया। डॉ.व्यास ने सीपीआर की तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी देते हुए बताया कि हृदयाघात, सांस रुकने, डूबने अथवा अचानक बेहोशी की स्थिति में सीपीआर किस प्रकार दिया जाना चाहिए। डॉ. व्यास ने बताया कि यदि सीपीआर तकनीक सही ढंग से और सही समय पर अपनाई जाए, तो मरीज को पुनर्जीवन देने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने डमी मॉडल के माध्यम से छाती दबाने की सही विधि, सांस देने की प्रक्रिया तथा आवश्यक सावधानियों का भी व्यावहारिक अभ्यास कराया। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण जिले के सभी जिला एवं उप जिला अस्पतालों में चरणबद्ध रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक स्वास्थ्यकर्मी इन जीवन रक्षक तकनीकों में दक्ष बन सकें। साथ ही भविष्य में स्कूलों, कॉलेजों एवं आमजन को भी सीपीआर एवं प्राथमिक उपचार के प्रति जागरूक करने की योजना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।
अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता जताई।
Author: Gautam Ujala
CHHAGAN LAL BHARDWAJ, Chief Additor, Pali( Rajsthan) mo-95090 70217


